नई दिल्ली: विटामिन D को अक्सर हड्डियों को मजबूत बनाने, इम्यून सिस्टम को सशक्त करने और मूड सुधारने के लिए सुझाया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच-परख के सप्लीमेंट्स लेना खतरनाक हो सकता है।
Dr. Vassily Kaganovich Vass, जो लोंगिविटी एक्सपर्ट हैं, बताते हैं कि “ज़्यादा विटामिन D लेने से कैल्शियम की build-up हो सकती है, जो धमनियों और गुर्दों (किडनी) को नुकसान पहुंचा सकती है।” उनका कहना है कि कई लोग सिर्फ दूसरों के अनुभव सुनकर सप्लीमेंट्स लेने लगते हैं, जबकि सबसे पहले अपने शरीर में विटामिन D का स्तर जांचना ज़रूरी है।
Dr. Jagadish Hiremath ने समझाया कि विटामिन D अकेले प्रभावी नहीं होता। “माइग्रेशियम और विटामिन K2 इसकी सक्रियता और वितरण में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर ये पर्याप्त नहीं होंगे, तो कैल्शियम हड्डियों में जमा न होकर धमनियों और किडनी में जा सकता है।”
संकेत और जोखिम:
शुरुआत में ज़्यादा विटामिन D लेने के लक्षणों में नौजिया, उल्टी, कब्ज़, थकान, ज्यादा प्यास या पेशाब शामिल हो सकते हैं। लंबे समय में यह धमनियों की सिकुड़न (arterial stiffness) और किडनी स्टोन या किडनी डैमेज का कारण बन सकता है।
डॉक्टरों की सलाह:
- सबसे पहले अपना विटामिन D स्तर जांचें (25-हाइड्रॉक्सी वेल्यू)।
- अगर सप्लीमेंट ले रहे हैं या जोखिम में हैं, तो हर 6-12 महीने में फिर से जांच करवाएँ।
- विटामिन D के साथ माइग्रेशियम और विटामिन K2 युक्त भोजन शामिल करें, जैसे:
- पत्तेदार हरी सब्ज़ियाँ
- नट्स और बीज
- अंडे की जर्दी
- फर्मेंटेड फूड्स
इस तरह सावधानी बरतकर विटामिन D लेने से स्वास्थ्य लाभ बढ़ सकता है और संभावित खतरे कम होते हैं।









