चीन ने शुरू किया नया K-Visa, अमेरिका के H-1B को टक्कर देने की तैयारी

बीजिंग: चीन ने दुनिया भर के तकनीकी और वैज्ञानिक पेशेवरों को अपने देश में काम करने के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से नया K-Visa प्रोग्राम शुरू किया है। इस वीज़ा के ज़रिए विदेशी नागरिक चीन में आकर शोध, तकनीकी विकास और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में काम कर सकेंगे।
चीन सरकार का कहना है कि यह वीज़ा उन लोगों के लिए है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ हैं। इस वीज़ा के लिए किसी चीनी कंपनी से पहले से नौकरी का प्रस्ताव होना जरूरी नहीं है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कई देशों में वर्क वीज़ा के नियम सख्त हो रहे हैं। चीन इस योजना के ज़रिए अपनी तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाना और दुनिया के कुशल पेशेवरों को आकर्षित करना चाहता है।
हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भाषा, संस्कृति और स्थानीय रोजगार जैसी चुनौतियाँ इस नीति के प्रभाव को प्रभावित कर सकती हैं। चीन में पहले से ही युवाओं की बेरोज़गारी दर ऊँची है, जिससे इस तरह की योजनाओं पर अलग-अलग राय सामने आ सकती है।
नीति विश्लेषकों के अनुसार, यह नया वीज़ा प्रोग्राम चीन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। फिलहाल, इस वीज़ा के आवेदन और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी आने वाले समय में स्पष्ट की जाएगी।







