अब कैंसर की पहचान के लिए दर्दनाक बायोप्सी या लंबी जांच प्रक्रियाओं की ज़रूरत शायद जल्द ही खत्म हो सकती है।
एक नए शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एक साधारण ब्लड टेस्ट से कैंसर को उसके शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है — यानी बीमारी के गंभीर रूप लेने से पहले ही इलाज शुरू किया जा सकता है।
इस टेस्ट को “मल्टी-कैंसर अर्ली डिटेक्शन (MCED) टेस्ट” कहा जा रहा है। इसमें खून के सैंपल के ज़रिए शरीर में मौजूद कैंसर-संबंधी डीएनए और प्रोटीन के विशेष पैटर्न की पहचान की जाती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट शरीर में होने वाले कई प्रकार के कैंसर को शुरुआती चरण में पकड़ सकता है, वो भी बिना किसी दर्दनाक प्रक्रिया या सर्जरी के।
अमेरिका में किए गए इस अध्ययन में 50 से 84 वर्ष की उम्र के लगभग 50 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
परिणामों में पाया गया कि यदि यह टेस्ट हर साल कराया जाए, तो कैंसर के उन्नत चरण (स्टेज IV) में मिलने वाले मामलों की संख्या में करीब 45% तक कमी आ सकती है।
साथ ही, शुरुआती स्टेज (स्टेज I और II) में कैंसर की पहचान की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, जिससे समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है।
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जगप्रीत छत्तवाल ने कहा,
“यह तकनीक भविष्य में कैंसर नियंत्रण के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
अगर इसे सामान्य हेल्थ चेकअप का हिस्सा बनाया गया, तो हम लाखों लोगों की जान बचा सकते हैं।”
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले और शोध की ज़रूरत होगी।
फिलहाल, यह खोज दुनिया भर के प्रमुख मेडिकल जर्नल्स में चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।









