झारखंड | झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित झारखंड उत्पाद सिपाही (Excise Constable) प्रतियोगिता परीक्षा के दौरान एक बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। राज्य पुलिस ने पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के गंभीर आरोपों के तहत कुल 159 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है।
इस बड़ी कार्रवाई ने राज्य की भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार 'सॉल्वर पेपर लीक' गिरोह का एक सक्रिय और अत्यंत प्रभावशाली सदस्य है।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाने और अवैध तरीके से प्रश्न पत्र लीक करने के धंधे में शामिल रहा है। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी ने कबूल किया है कि उसका गिरोह योजनाबद्ध तरीके से अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का प्रलोभन देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस की विशेष टीम ने राज्य के विभिन्न केंद्रों पर छापेमारी कर इन गिरफ्तारियों को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि आरोपियों के पास से संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
पुलिस को शक था कि सॉल्वर गैंग के सदस्य ब्लूटूथ और अन्य अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के भीतर बैठे अभ्यर्थियों को उत्तर उपलब्ध करा रहे थे। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में लिया और गहन पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की।
झारखंड सरकार और पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि वे परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। भर्ती परीक्षाओं में इस प्रकार की धांधली को रोकने के लिए कड़े कानून और निगरानी तंत्र को और भी मजबूत किया जा रहा है। इस घटना के बाद उन हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों में चिंता का माहौल है जो लंबे समय से इस परीक्षा के लिए मेहनत कर रहे थे। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की जड़ तक जाया जाएगा और इस रैकेट में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। निष्कर्ष: राज्य में निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाएं तंत्र के सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करती हैं।