मध्य प्रदेश के खंडवा और महेश्वर क्षेत्र से जुड़ा चर्चित मोनालिसा भोसले और मोहम्मद फरमान का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में मध्य प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम, जिसमें एक महिला सब-इंस्पेक्टर और चार अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे, केरल के कोच्चि पहुंची थी। इस टीम का मुख्य उद्देश्य प्रयागराज कुंभ के दौरान वायरल हुई मोनालिसा और उसके पति मोहम्मद फरमान को हिरासत में लेना था। हालांकि, यह दौरा पुलिस के लिए काफी निराशाजनक रहा और टीम को खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस जब कोच्चि पहुंची तो मोहम्मद फरमान ने उन्हें सूचित किया कि उसकी पत्नी मोनालिसा वर्तमान में गर्भवती है। गर्भावस्था की स्वास्थ्य जटिलताओं का हवाला देते हुए उसने पुलिस के सामने तुरंत पेश होने में असमर्थता जताई। मध्य प्रदेश की महेश्वर पुलिस की टीम, जो 17 मार्च को वहां पहुंची थी, इस जोड़े का सटीक पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने में विफल रही। इसके साथ ही पुलिस को फरमान के दोस्त जोशुआ की भी तलाश थी, जिसने शादी की व्यवस्था से लेकर जोड़े के वहां रहने तक के इंतजाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, परंतु वह भी पुलिस की पकड़ में नहीं आया।
इस कानूनी विवाद की जड़ें मोनालिसा की उम्र को लेकर उपजे विवाद में छिपी हैं। इस जोड़े ने बीती 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में विवाह किया था। विवाह के तत्काल बाद मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि मोनालिसा की आयु मात्र 16 वर्ष है और वह नाबालिग है। पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद फरमान के खिलाफ अपहरण और पॉक्सो (POCSO) एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इसके अतिरिक्त, मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
दूसरी ओर, मोनालिसा का अपना दावा है कि वह 18 वर्ष की बालिग है और उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है। मामला तब और पेचीदा हो गया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच रिपोर्ट में भी उसे नाबालिग पाया गया। इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए फरमान के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर 20 मई तक के लिए रोक लगा दी है। पुलिस की कार्रवाई की आहट मिलते ही मोनालिसा ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कोच्चि पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी, जिसमें उसने जबरन मध्य प्रदेश ले जाने की आशंका जताई थी। फिलहाल, कानूनी दांवपेंच और मेडिकल ग्राउंड्स के चलते एमपी पुलिस की जांच थमती नजर आ रही है।
इस मामले में कानूनी और सामाजिक पहलुओं का टकराव जारी है और पुलिस को अगली कार्यवाही के लिए अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।