झारखंड: द्वितीय विश्व युद्ध की हवाई पट्टियां होंगी सक्रिय राज्यों को मिल सकता फायदा – तय करो
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झारखंड: द्वितीय विश्व युद्ध की हवाई पट्टियां होंगी सक्रिय राज्यों को मिल सकता फायदा

Admin Desk
झारखंड: द्वितीय विश्व युद्ध की हवाई पट्टियां होंगी सक्रिय राज्यों को मिल सकता फायदा

झारखंड | झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की एक उच्चस्तरीय टीम ने राजधानी रांची से चाकुलिया और धालभूमगढ़ पहुंचकर द्वितीय विश्व युद्ध के समय की बंद पड़ी हवाई पट्टियों का व्यापक निरीक्षण किया है।

 

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यह कदम क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। अंचल अधिकारी नवीन पुरती की उपस्थिति में विशेषज्ञों की टीम ने चाकुलिया स्थित लगभग 515 एकड़ में फैली विशाल हवाई पट्टी के प्रत्येक हिस्से का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। इस गहन सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य हवाई पट्टी की वर्तमान भौतिक स्थिति और वर्षों से हुई क्षति के स्तर का आकलन करना था।

 

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टीम ने विशेष रूप से रनवे की मजबूती और धरातलीय संरचना की जांच की ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भविष्य में यहां विमानों की लैंडिंग कितनी सुरक्षित और तकनीकी रूप से संभव है। चाकुलिया के बाद एएआई की टीम धालभूमगढ़ एयरपोर्ट पहुंची। वहां राजस्व अधिकारियों के साथ एक संयुक्त सर्वे किया गया, जिसमें हवाई अड्डे की सीमाओं का निर्धारण और संभावित अतिक्रमण की स्थिति की गहन समीक्षा की गई।

 

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अधिकारियों ने जानकारी दी कि इन दोनों स्थलों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस रिपोर्ट को 24 अप्रैल 2026 तक केंद्र सरकार को सौंप दिया जाएगा, जिसके आधार पर ही इन हवाई पट्टियों के विकास की आगामी रूपरेखा तय की जाएगी। इन हवाई पट्टियों का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। इनका निर्माण ब्रिटिश शासन काल में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रणनीतिक अभियानों और लड़ाकू विमानों के सुरक्षित ठहराव के लिए किया गया था।

 

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हालांकि, आजादी के बाद दशकों तक ये महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे उपेक्षित रहे। पूर्व में चाकुलिया को एक ‘कार्गो एयरपोर्ट’ और धालभूमगढ़ को ‘इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव आए थे, लेकिन वे धरातल पर नहीं उतर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को गति मिलती है, तो इसका सीधा लाभ झारखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती जिलों को भी मिलेगा। केंद्र सरकार का वर्तमान दृष्टिकोण न केवल हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है, बल्कि सुरक्षा मानकों को पुख्ता कर भविष्य की संभावनाओं को सुरक्षित करना भी है। इन हवाई पट्टियों का पुनरुद्धार पूर्वी भारत के आर्थिक और सामरिक विकास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

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