न्यूट्रिशनिस्ट Lovneet Batra के अनुसार, रोजाना 1 चम्मच मोरिंगा एनीमिया को मैनेज करने और थकान कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि यह एक प्राकृतिक सप्लीमेंट है, इसलिए इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, लेकिन सही समय और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
भारत में एनीमिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है, जो प्रजनन आयु की 50% से अधिक महिलाओं और बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित कर रहा है। इसके लक्षणों में लगातार थकान, चक्कर आना, कमजोर नाखून और शरीर में ऊर्जा की कमी शामिल हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन अब विशेषज्ञ फूड-बेस्ड समाधान पर जोर दे रहे हैं, जिसमें Moringa Oleifera को काफी प्रभावी माना जा रहा है।
आयरन की कमी को दूर करने के लिए जरूरी है कि शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषण हो। रोजाना केवल एक चम्मच मोरिंगा को डाइट में शामिल करके इस कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
एनीमिया क्या है और आयरन क्यों जरूरी है?
एनीमिया तब होता है जब शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन नहीं होता। हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है, और इसकी कमी से शरीर के अंगों को सही मात्रा में ऊर्जा नहीं मिल पाती। न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, आयरन हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी तत्व है और इसकी कमी से अत्यधिक थकान महसूस होती है।
महिलाएं, खासकर मासिक धर्म के कारण, शाकाहारी लोग और गर्भवती महिलाएं इस समस्या के ज्यादा जोखिम में रहती हैं। पर्याप्त आयरन के बिना शरीर अपनी ऊर्जा बनाए नहीं रख पाता।
क्यों फायदेमंद है मोरिंगा?
न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, मोरिंगा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक तत्व होने के साथ-साथ अब एक “सुपरफूड” के रूप में भी जाना जा रहा है। इसकी पत्तियों में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो एनीमिया से जुड़े लक्षणों को सीधे प्रभावित करते हैं।
मोरिंगा में आयरन के साथ-साथ विटामिन C भी होता है, जो आयरन के अवशोषण में मदद करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन A और फोलेट भी होते हैं, जो रेड ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए जरूरी हैं।
1 चम्मच मोरिंगा कैसे करता है असर?
रिसर्च के अनुसार, छोटी मात्रा में नियमित सेवन से ही हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार देखा जा सकता है। करीब 5 ग्राम (1 चम्मच) मोरिंगा पाउडर शरीर को पर्याप्त आयरन प्रदान करता है।
यह एक प्राकृतिक स्रोत होने के कारण सिंथेटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में कम साइड इफेक्ट्स देता है, जैसे मतली या कब्ज की समस्या। साथ ही यह बोन मैरो को रेड ब्लड सेल्स बनाने में सपोर्ट करता है, जिससे शरीर की कमजोरी और थकान कम होती है।