नयी दिल्ली: देश में शिशुओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय वर्तमान में दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पीडियाट्रिक कफ सिरप (खांसी की दवा) के नुस्खे या प्रिस्क्रिप्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके साथ ही, मंत्रालय पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी इन दवाओं के उपयोग को हतोत्साहित करने की योजना बना रहा है।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय के इस संभावित निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों में इन दवाओं के दुष्प्रभावों को रोकना और उनके स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है। चिकित्सा विशेषज्ञों का लंबे समय से यह मानना रहा है कि नवजातों और बहुत छोटे बच्चों में कफ सिरप का उपयोग उनके श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पूर्व में कई बार बहुत छोटे बच्चों के लिए कफ और कोल्ड की दवाओं के इस्तेमाल के प्रति वैश्विक स्तर पर सचेत कर चुका है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप के नैदानिक फायदे बहुत सीमित हैं, जबकि इसके जोखिम अधिक हो सकते हैं। कई मामलों में यह देखा गया है कि इन दवाओं के अत्यधिक उपयोग या गलत खुराक से बच्चों में सुस्ती, सांस लेने में कठिनाई, एलर्जी या अन्य गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। सरकार की योजना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य केंद्रों को यह सख्त निर्देश और सलाह दी जाए कि वे छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप के बजाय वैकल्पिक सुरक्षित उपचार पद्धतियों का ही चयन करें।
यह कदम वैश्विक स्तर पर खांसी की दवाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय निर्मित कफ सिरप को लेकर उठने वाले सवालों के बाद, भारत सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और उनके उपयोग की उम्र सीमा को लेकर कड़े मानक अपनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और अन्य विशेषज्ञ तकनीकी समितियां वर्तमान में इस प्रस्ताव के कानूनी और चिकित्सीय पहलुओं पर विस्तृत चर्चा कर रही हैं।
यदि यह प्रतिबंध लागू होता है, तो दवा कंपनियों को अपनी दवाओं की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग रणनीतियों में भी व्यापक बदलाव करना होगा। चिकित्सा विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता को भी इस विषय में जागरूक होना चाहिए और छोटे बच्चों में सामान्य सर्दी-खांसी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के ओवर-द-काउंटर कफ सिरप का उपयोग कतई नहीं करना चाहिए। निष्कर्षतः, स्वास्थ्य मंत्रालय का यह प्रस्तावित निर्णय देश के भविष्य यानी बच्चों को दवाओं के संभावित हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।