रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के सर्जरी विभाग ने एक मरीज की पीठ से 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नया जीवन दिया है।
यह न केवल एक सफल शल्य चिकित्सा है, बल्कि छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की विशेषज्ञता, तकनीकी कौशल और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण भी है।
यह जटिल ऑपरेशन अस्पताल के अधीक्षक और प्रसिद्ध लेप्रोस्कोपिक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष सोनकर एवं सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। मरीज पिछले लगभग 15 वर्षों से इस विशाल गांठ के बोझ के साथ जीवन जीने को मजबूर था।
समय के साथ स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि मरीज का चलना-फिरना, उठना-बैठना और दैनिक कार्य करना दूभर हो गया था। ट्यूमर के भारी वजन ने उसे न केवल शारीरिक पीड़ा दी, बल्कि वह लंबे समय से सामाजिक असहजता और गहरे मानसिक तनाव का भी सामना कर रहा था।
चिकित्सा जगत के आंकड़ों और मेडिकल लिटरेचर पर नजर डालें तो भारत में अब तक आमतौर पर 8 किलोग्राम तक के ट्यूमर निकालने के सफल मामलों का उल्लेख मिलता है। ऐसे में अंबेडकर अस्पताल द्वारा 10.30 किलो के ट्यूमर का सफल निष्कासन राष्ट्रीय स्तर पर एक असाधारण और गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
इस ऐतिहासिक शल्य चिकित्सा में वरिष्ठ सर्जन डॉ. राजेंद्र रात्रे, डॉ. मयंक भूषण मिश्रा और सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रेक्षा जैन ने अपने उत्कृष्ट शल्य कौशल का परिचय दिया। इसके साथ ही, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. जया लालवानी और डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की शारीरिक स्थिरता बनाए रखकर सराहनीय भूमिका निभाई।
ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, ऊतकों की सुरक्षा और संक्रमण जैसे कई गंभीर जोखिम थे, लेकिन डॉक्टरों की सटीक योजना और सामूहिक समन्वय ने इस चुनौती को जीत में बदल दिया।
डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल उच्चस्तरीय और जटिल ऑपरेशनों के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। यह सफलता न केवल संस्थान के लिए गर्व की बात है, बल्कि प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक मील का पत्थर है।
अंततः, अंबेडकर अस्पताल की यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि समर्पण और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मेल से असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों को भी सुधारा जा सकता है।